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Thursday, November 1, 2018

ग़ज़ल

आसमां का सर झुकाते मेरे ये पर देखिए
आप भी परवाज़ मेरी आज़मा कर देखिए
آسمان کا سر جھکاتے میرے یہ پر دیکھیے
آپ بھی پرواز میری آزما کر دیکھیے
कौन कहता है ज़माने में नहीं सच का निशां
रक्स करता है सलीबों पर ये अक्सर देखिए
کون کہتا ہے زمانے میں نہیں سچ کا نشان
رقص کرتا ہے صلیبوں پر یہ اکثر دیکھیے
इश्क मेरा देख कर था रश्क मुझ से आपको
किस क़दर बर्बाद हूं अब मुझ को आकर देखिए
عشق میرا دیکھ کر تھا رشک مُجھسے آپکو
کس قدر برباد ہوں اب مجھ کو آکر دیکھیے
इश्क आदम औ ख़ुदा ही हर तरफ मामूद है
इस जमीं पर, आसमां पर, जिस जगह पर देखिए
عشق آدم و خدا ہے ہر طرف موڑ ہے
اس زمین پر آسمان پر جس جگہ پر دیکھیے
दर्द की कारीगरी को देखकर हैरान हूं
खुश्क पलकों के तले है अश्क का घर देखिए
درد کی کاریگری کو دیکھ کر حیران ہوں
خشک پلکوں کے تلے ہے عشق کا گھر دیکھیے
गर मुहब्बत में फनां होना वफ़ा की शर्त है
जान हाजिर है सनम इक बार कह कर देखिऐ
گر محبت میں فنا ہونا وفا کی شہرت ہے
جان حاضر ہے صنم ایک بار کہ کر دیکھیے

جگجیت کافر जगजीत काफ़िर

Tuesday, February 15, 2011

शिकवा


ऎ खुदा तेरे करम पे क्या इतना भी हक नहीं ?
 इस काफ़िर कि कोई आरज़ू मन्ज़िल पे पहुन्च जाये .