Friday, September 6, 2019

ग़ज़ल ( हबीब आकर )

हमारे हाल पे रोते हैं सब हबीब आकर
असीर-ए-ग़म को दवा दे कोई तबीब आकर

मेरी तलाश में कब से भटक रही थी जो
लिपट गई है बदन से मेरे सलीब आकर

खुदा के खौफ की बातें, वो ख़्वाब जन्नत के
सुना रहे हैं फसाने, मुझे ख़तीब आकर

तुम्हारे इश्क ने मुझसे, मुझी को मांगा था
बदन उतार दिया है तेरे करीब आकर

मिटा सका ना ख़ुदी को 'तेरी' तरह 'काफ़िर'
इस एक बात पे रोया मेरा रकीब आकर

जगजीत काफ़िर

असीर-ए-ग़म = prisoner of sorrow
ख़तीब = a preacher, a public speaker or Orator

तबीब = doctor, physician

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