Wednesday, March 9, 2011

दीवानगी


कतरा कतरा दिल के अन्दर दर्द टपकता रह्ता है.
जाने क्यो हर कतरा मुझसे सागर कि खवाहिश करता है.
मै कुरेद रहा हू ज़ख्मो को, के दर्द हि मेरी ताकत है.
अपनो के हाथो ज़खमी होना इस पागल दिल कि आदत है.
क्यो खुशिया ढून्ढू दुनिया मे, खुशियो कि हकीकत झूठी है.
नये दर्द को पैदा करती है, हर आस जो दिल कि टूटी है.
हाथो कुचले अरमानो कि इक कसक सि दिल मे उठ्ती है.
हर कसक के बायस ज़िन्द्गगी मेरि लम्हा लम्हा मिट्ती है.
क्यो तन्हाई मे आने कि अश्को को इज़ाजत देता हू.
खारे पानि के चन्द कतरो को हासिल-ए-मोहब्बत कह्ता हू.
मै डूबा हू पैमानो मे या फ़िर उसकी आन्खो मे.
देखे किस रस्ते पर मुझको कज़ा का दामन मिलता है.

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